उम्मीद की किरण ,बागड़ी मिल्क पार्लर।

Bagri Milk Parlor
Bagri Milk Parlor

जब पूरे देश का किसान देवता सरकारी नीतियों के आगे हारकर याचक की भूमिका में खड़ा है!खुद रास्ता खोजने में नाकाम नजर आ रहा है! ऐसे समय मे एक युवा इं प्रदीप श्योराण हमारे बीच अपनी अपनी सोच व हुनर के साथ डटकर खड़ा हो जाता है और कहता है आओ इधर!मैं तुम्हे दलदल को उपजाऊ खाद के रूप में प्रयोग करने का तरीका बताता हूँ।

चरखी दादरी के मांढी पिरानु गांव में अध्यापक के घर पैदा हुए प्रदीप श्योराण का नाम चर्चा में है।घर मे माँ का खेती व पशुपालन में लगाव बचपन मे गहराई से अनुभव किया।स्कूली पढ़ाई में तेज प्रदीप को घरवालों ने कोटा कोचिंग के लिए भेज दिया।चाहे एमडीयू रोहतक से ग्रेजुएशन का सफर हो या गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से एमबीए का,प्रदीप के दिलो-दिमाग मे माँ की मेहनत को बुलंदियां देने का सपना साथ चलता रहा!

कहा जाता है कि इंसान कि मौत तब होती है जब उनके सपने मर जाते है।प्रदीप ने सपने को साकार करने के लिए शुरुआती समझौते जरूर किये मगर सपने को हकीकत के धरातल पर उतारने का सफर नहीं छोड़ा,एमबीए के बाद प्रदीप ने बर्जर पैंट्स, हैवेल्स,अकजोनोबेल जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों में बतौर मार्केटिंग सेल्स मैनेजर की नौकरी की और सपने को ब्रांड के रूप में स्थापित करने की बारीकियां सीखी।जब युवा किसान के बेटे लाखों रुपये के पैकेज की नौकरी पर इतराते हुए अपने ही पुश्तैनी धंधे को बंद करके खुद को सफल मानने के अहम में भटक जाते है उसी लाखों के पैकेज की नौकरी को प्रदीप ने मात्र पुश्तैनी धंधे को संभालने की शिक्षा की पाठशाला मात्र माना।

किसान याचना से खुशहाल नहीं होगा,किसान आंदोलनों से आबाद नहीं होग,किसानों के पढ़े लिखे बच्चे जब नौकरियों को जीवनयापन का माध्यम बनाने के बजाय पाठशाला के रूप में समझकर खेती में अपना योगदान देंगे तब तक किसानों का भला होगा।

नौकरी के दौरान प्रदीप ने विभिन्न बिज़नेस आईडिया पर काम किया और जून 2018 में अंततः नौकरी से त्याग पत्र दे दिया।लाखों की नौकरी करने वाला प्रदीप 17दिसंबर 2018 को रोहतक शहर के एक नुक्कड़ पर “बागड़ी मिल्क पार्लर”नाम की रेहड़ी पर खड़ा था जहां सर्दी के मौसम में लोगों को कुल्हड़ में गर्मा-गर्म दूध पिला रहा था।इस दूध में कुछ नया था,सीधे किसान के घर से लाकर केसर-बादाम के साथ गर्म किया गया और सीधे कुल्हड़ में भरकर ग्राहक के हाथों में, इसमें शुद्धता का स्वाद था और लोगों ने हाथोंहाथ लिया।

जब दुनियाँ फ्लेवरयुक्त दूध से शुद्ध ड्राई फ्रूट के साथ तैयार दूध के स्वाद को अपनाती है तो हर चीज में शुद्धता की चाहत होती है,यहां प्रदीप के एमबीए की डिग्री व सेल्स मैनेजर का अनुभव काम आया और लोगों की चाहत को मांग में तब्दील करके शुद्ध बिलौने का घी,ऑर्गेनिक गुड़,चीनी,खाण्ड से लेकर ऑर्गेनिक सरसों तेल तक उपलब्ध करवाने की तरफ कदम बढ़ाए।

प्रदीप का आईडिया चल निकला और चल निकला उन लोगों का संसार जो अपनी मेहनत कौड़ियों के भाव बिचौलियों को बेचने को मजबूर थे। शुद्ध बिलौने का घी पशुपालन को बढ़ावा दे रहा है,कई किसान ऑर्गेनिक गुड़ बनाने लगे,खाण्ड बनाने लगे व सरसों की खेती करके तेल निकालने लगे।पशुपालक व किसानों को बेहतर कीमत मिलने लगी और दलदल से नजर आने वाले ये धंधे उजलत की नजीर बनने लगे।प्रदीप का खुद का सपना एक ब्रांड के रूप में स्थापित होने जा रहा है और सैंकड़ों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहा है।

एक सपने से ब्रांड का निर्माण होता है।गधे पर मसाले बेचने वाला कब मसालों का शहंशाह बन जाता है कोई नहीं जानता मगर सपने को देखने वाले का त्याग व समर्पण इसकी बुनियाद होता है और सपना देखने वाला ही यह सच जानता है।आज बागड़ी मिल्क पार्लर हर जगह अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा रहा है।

20 अप्रैल 2019 को मंसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में देश के भावी कर्णधारों अर्थात आईएएस अधिकारियों ने प्रदीप के मॉडल को समझने के लिए डेमों करवाया व बड़े ही सकारात्मकता के साथ इस तरफ कदम बढ़ाने की बात की।हरियाणा कृषि मेले से लेकर पूसा के कृषि मेलों में बागड़ी मिल्क पार्लर के प्रोडक्ट सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है!एक साल के भीतर प्रदीप जिस पैकेज को छोड़ आये उनसे आगे बढ़ चुके है!

प्रदीप का भाई धर्मेंद्र श्योराण भी पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को अपने भविष्य की राह बनाने की ठानी है।धर्मेंद्र ड्रिप इर्रिगेशन के माध्यम से बागवानी व कपास की खेती करने वाला पहला किसान है।

खुद के सपनों को कभी मरने मत दो।सपनों को पालो और उनके लिए जुट जाओ !हर उद्यमी की सफलता का असली राज यही है कि वो सपनो के लिए जिये और सफलता की सीढियां हासिल की।खेती भविष्य की सबसे बड़ी उद्यमशीलता का क्षेत्र है,करोड़ों अवसर पैदा करने वाली है।बस समय की नजाकत व मांग के अनुरूप बदलाव लाने की जरूरत है।सरकारी नीतियों में भले ही कृषि को जीडीपी बढ़ाने वाला उद्यम न माना जाता हो मगर “बागड़ी मिल्क पार्लर”जैसे आईडिया जरूर बिचौलियों को खत्म करते हुए कृषि व पशुपालन को उद्यम के स्पेशल इकनोमिक जॉन बना सकते है!

विशेषकर किसानों के उन बच्चों को प्रदीप से सीख लेनी चाहिए जो एमए,एमएससी,पीएचडी करने के बाद चतुर्थ श्रेणी की नौकरी हासिल करने के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय यूँ ही जाया कर रहे है!

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